क्या खो गए हैं हम
क्या खो गए हैं
उस स्कूल के किसी
किताबी पन्ने में
या वो स्कूल ही
खुद में एक पन्ना था
जिसे अपनी इस किताब में हम यूं सँजोये रखे रहे
या शायद एक सुनहरी ग़ज़ल
जिसे आज फिर गुनगुनाने को जी करता है
जी करता है की आज फिर वो पन्ना मिल जाए
वो ग़ज़ल मिल जाए
वो ग़ज़ल को गुनगुनाने वाले राग मिल जाए
हाए क्या बात बन जाए
ना जाने क्यों
आज फिर दिल करता है
दिल कहता है की मन करता है
की उस पन्ने की नाव बना कर
हो सवार उसमे
बस चलता जाऊ, चलता जाऊ